नोएडा

EWS Quota Fraud: ​थार-बुलेट वाले गरीब बन हड़प रहे RTE सीटें, कोठियों में रहने वालों का फर्जीवाड़ा उजागर

EWS Quota Fraud: फर्जी आय प्रमाणपत्र और गलत पते के सहारे EWS कोटे पर कब्जा; जिला प्रशासन सख्त, अपात्रों पर तहसील स्तर से होगी बड़ी कार्रवाई।

Reported by India Headlines and edited by Kashish Solanki

EWS Quota Fraud: शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित सीटों पर अमीर परिवारों का एक बहुत चौंकाने वाला मामला उभरकर आया है। विलासितापूर्ण मकानों में रहने वाले और फॉर्च्यूनर, थार व बुलेट जैसी महंगी गाड़ियों का इस्तेमाल करने वाले लोग जाली दस्तावेज तैयार करके अपने बच्चों का नाम नामी प्राइवेट स्कूलों में दर्ज करा रहे हैं। इस धोखाधड़ी की वजह से असली हकदार और जरूरतमंद बच्चे लॉटरी में नाम आने के बावजूद एडमिशन के लिए भटकने को मजबूर हैं।

महंगी गाड़ियां, गरीबी का खेल

ग्रेटर नोएडा के विभिन्न स्कूलों और जांच अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सम्पन्न परिवारों के लोग सरकारी प्रणाली की कमजोरियों का लाभ उठाकर नकली आय प्रमाणपत्र बनवा रहे हैं।

लखनावली गांव का मामला: आरसीएस मेमोरियल स्कूल प्रबंधन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल पंवार को तीन छात्रों के प्रमाण प्रस्तुत किए हैं, जिनके माता-पिता के पास दो मंजिला आलीशान घर, थार वाहन और बुलेट बाइक मौजूद हैं। ये अभिभावक नियमित रूप से इसी प्रकार की लग्जरी गाड़ियों से बच्चों को स्कूल छोड़ने आते हैं।

80% मामलों में धोखाधड़ी: जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रेणु सहगल ने इस पर गहरी चिंताओं का इज़हार करते हुए कहा कि आरटीई के तहत रजिस्ट्रेशन कराने वाले कई अभिभावक गलत जानकारियां प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में आरटई से जुड़े लगभग 80 फीसदी मामलों में अमीर लोग जिनके पास महलनुमा घर और महंगी गाड़ियाँ हैं, शामिल पाए गए हैं। नोएडा के एक स्कूल ने भी शिकायत की है कि एक छात्र का आरटीई में आवेदन आया है, जिसके परिवार के पास खुद का बड़ा मकान और चार पहिया वाहन है।

आंकड़ों की बाजीगरी और एडमिशन विवाद

इस साल जिले में आरटीई के तहत 4330 सीटें आवंटित हुई थीं, लेकिन इस बड़े धोखाधड़ी और विवादों के कारण अब तक सिर्फ 3600 से अधिक बच्चों के ही एडमिशन हो पाए हैं। लॉटरी में नाम आने के बावजूद निजी स्कूल प्रबंधन अपात्रों को दाखिला देने से मना कर रहे हैं और लगातार इस पर प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं।
हाल ही में डीएम के आदेश पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें एडमिशन नहीं लेने वाले 35 स्कूलों के प्रबंधन से सवाल किया गया। इस बैठक में स्कूलों ने सीधे अपात्र छात्रों के चयन का मुद्दा उठाया और धोखाधड़ी के प्रमाण प्रस्तुत किए।

तहसील स्तर पर होगी जांच

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि जिले के 15 स्कूलों ने आय प्रमाणपत्र और आधार कार्ड में गलत पते की लिखित शिकायत की है। मुख्य विकास अधिकारी ने स्कूलों से सभी गलत प्रमाणपत्रों के तथ्यों के साथ रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन सभी संदिग्ध दस्तावेजों की जांच तहसील स्तर पर कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले प्रभावशाली अभिभावकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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